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60सदस्यीय दल के साथ श्रावस्ती पहुंचा श्रीलंका का दल अपने रीति रिवाज में किया पूजा अर्चना

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हेमंत कुमार श्रीवास्तव

इकौना-श्रावस्ती। श्रावस्ती बुद्ध की तपोस्थली में श्रीलंका के 60 बौद्ध अनुयायियों ने गंध कुटी पर अपने रीति रिवाज में पूजा अर्चना माता सुमेधा थेरो की अध्यक्षता में किया ।इस दौरान बौद्ध भिक्षुणी  सुमेधा  थेरो ने कहा कि बौद्ध दर्शन के दो प्रमुख सिद्धांत हैं।

पहला यह कि समझ लेना कि वास्तव मे ज्ञान इस संसार से परे की किसी शक्ति को जानना नही अपितु संसार मे होने वाले दुख का निवारण करने के उपाय ढूँढना कर उन पर आचरण करना है ।

अध्यात्म मनुष्य का दुख दूर नही करता बल्कि केवल यह जानकारी कि क्यूँकि संसार मे हर वस्तु अवस्थापरिवर्तनशील है इसलिये दुख की अवस्था भी अवश्य बीतेगी और सुख आएगा - इसी अटल सत्य को जानना सच्चा ज्ञान ह और यह ही दुख का निवारण करता है।दुख निवारण चार सत्बौयो को जान लेने से सम्द्धभव हो दाता है।


यह चार सत्य हैं- संसार मे दुख है, दूसरे , इस दुख का कारण है, तीसरे, दुख का कारण दूर करने से दुख दूर किया जा सकता है और चौथा कि मध्यम मार्ग पर आचरणों करने से दुख दूर होता है।

मध्यम या माध्यमिक मार्ग ही बौद्ध दर्शन की दूसरी शिक्षा है। माध्यमिक मार्ग से अभिप्राय है कि किसी भी वस्तु, गुण अथवा प्रवृति का न तो आधिक्य हो और न ही कमी या सर्वथा अभाव । सब कुछसंतुलित अनुपात मे हो या किया जाए। इस संतुलन की अवस्था को आचरण का माध्यमिक मार्ग कहा गया है और माध्यमिक के लिये ही दूसरी संज्ञा है’ सम्यक् ‘ ।

बौद्ध दर्शन सम्यक् आचरण पर बल देता है जिसके आठ अंग हैजैसे सम्यक् ज्ञान, सम्यक् विचार , सम्यक् आचरण , सम्यक् समाधि इत्यादि । सो माध्यमिक मार्ग को अष्टांगिक मार्ग भी कहा गया है ।

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